भारत में पारंपरिक तकनीक से हाथ से सिला गया ऐतिहासिक जहाज INSV कौंडिन्य 18 दिनों की चुनौतीपूर्ण समुद्री यात्रा के बाद ओमान की राजधानी मस्कट पहुंच गया। बुधवार को जहाज के मस्कट तट के समीप पहुंचने की आधिकारिक पुष्टि हुई। यह यात्रा भारतीय समुद्री विरासत के पुनर्जीवन की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है।
29 दिसंबर को पोरबंदर से हुआ था रवाना
INSV कौंडिन्य ने 29 दिसंबर 2025 को गुजरात के पोरबंदर से अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय समुद्री यात्रा की शुरुआत की थी। यह यात्रा 15 दिनों में पूरी होनी थी, लेकिन समुद्री परिस्थितियों के कारण इसे पूरा करने में 18 दिन लगे। जहाज पर कमांडर विकास श्योराण के नेतृत्व में 16 सदस्यीय दल सवार था।
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस ऐतिहासिक क्षण की जानकारी साझा करते हुए लिखा— “इस पल का आनंद ले रहे हैं… हमने कर दिखाया।”
वहीं, क्रू सदस्य हेमंत कुमार ने लिखा— “लैंड अहॉय! मस्कट दिखाई दिया। गुड मॉर्निंग इंडिया, गुड मॉर्निंग ओमान।”
समुद्री मार्ग से बिना रुके अकेले विश्व भ्रमण करने वाले पहले भारतीय, रिटायर्ड नौसेना कमांडर अभिलाष टॉमी ने भी कौंडिन्य की पूरी टीम को बधाई दी।
अजंता गुफाओं की पेंटिंग से प्रेरित अनोखा डिजाइन
INSV कौंडिन्य का डिजाइन अजंता गुफाएं की 5वीं सदी की एक पेंटिंग पर आधारित है। इस जहाज का निर्माण गोवा की एक निजी कंपनी ने लगभग 2000 साल पुरानी टांका (stitched) पद्धति से किया है। लकड़ी के तख्तों से बने इस जहाज को नारियल के रेशों से सिला गया है और इसमें कहीं भी कीलों का उपयोग नहीं हुआ है।
इस जहाज में न तो इंजन है और न ही GPS। चौकोर सूती पाल और पैडल से चलने वाला यह पोत पूरी तरह हवा पर आधारित है। पालों पर गंडभेरुंड और सूर्य के प्रतीक उकेरे गए हैं, जबकि आगे सिंह याली की आकृति और डेक पर हड़प्पा शैली का पत्थर का लंगर लगाया गया है, जो भारत की प्राचीन समुद्री परंपराओं को दर्शाता है।
प्राचीन नाविक कौंडिन्य के नाम पर रखा गया जहाज
जहाज का नाम पहली सदी के प्रसिद्ध भारतीय नाविक कौंडिन्य के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने हिंद महासागर पार कर मेकांग डेल्टा तक यात्रा की थी और वहां एक कंबोडियाई राजकुमारी से विवाह किया था। यह जहाज भारत की समुद्री खोज, व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान की समृद्ध परंपरा का प्रतीक है।
केंद्र सरकार की पहल, नौसेना की तकनीकी देखरेख
भारत की प्राचीन जहाज निर्माण कला को विश्व मंच पर लाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने वर्ष 2023 में इस परियोजना को मंजूरी दी थी। इसके बाद संस्कृति मंत्रालय, भारतीय नौसेना और गोवा की निजी बोट बिल्डर कंपनी होड़ी इनोवेशंस के बीच त्रिपक्षीय समझौता हुआ।
फरवरी 2025 में जहाज को गोवा में लॉन्च किया गया था। केरल के मास्टर शिपराइट बाबू शंकरन के नेतृत्व में हजारों कारीगरों ने इसे अपने हाथों से तैयार किया है।
INSV कौंडिन्य आज दुनिया के किसी भी आधुनिक नौसैनिक जहाज से अलग है और यह भारत की प्राचीन समुद्री तकनीक की जीवंत मिसाल बनकर उभरा है।




