प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार सुबह केंद्रीय राज्यमंत्री एल मुरुगन के आवास पर आयोजित पोंगल समारोह में शामिल हुए। इस दौरान प्रधानमंत्री ने पूजा-अर्चना की और गाय को भोजन भी कराया।
समारोह को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि तमिल संस्कृति दुनिया की सबसे प्राचीन जीवित सभ्यताओं में से एक है, जो सदियों को आपस में जोड़ती है। उन्होंने कहा कि आज पोंगल केवल एक क्षेत्रीय पर्व नहीं रहा, बल्कि यह एक ग्लोबल त्योहार बन चुका है।
पीएम मोदी ने कहा,
“दुनिया भर में तमिल समुदाय और तमिल संस्कृति से प्रेम करने वाले लोग पोंगल को बड़े उत्साह से मनाते हैं। मुझे गर्व है कि मैं भी उनमें से एक हूं।”
पीएम मोदी के संबोधन की प्रमुख बातें
- पोंगल हमें प्रकृति, परिवार और समाज के बीच संतुलन का महत्व सिखाता है।
- यह पर्व जमीन और सूर्य देव के प्रति हमारी कृतज्ञता को दर्शाता है।
- भारतीय परंपराएं प्रकृति के साथ सामंजस्य का संदेश देती हैं।
- तमिल संस्कृति की जड़ें हजारों वर्षों पुरानी हैं।
- पोंगल आज पूरी दुनिया में मनाया जाने वाला पर्व बन चुका है।
- भारतीय कृषि परंपरा का यह जीवंत प्रतीक है।
पोंगल क्या है?
पोंगल तमिल समुदाय का प्रमुख फसल उत्सव है, जो हर वर्ष 14 से 17 जनवरी के बीच, मकर संक्रांति के आसपास मनाया जाता है। यह पर्व सूर्य देव, प्रकृति, पशुओं और किसानों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है।
पोंगल चार प्रमुख दिनों में मनाया जाता है:
- भोगी पोंगल
- सूर्य पोंगल
- मट्टू पोंगल
- कानूम पोंगल
इस अवसर पर नए चावल से पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं, जिनमें सक्कराई पोंगल (मीठा) और वें पोंगल (नमकीन) प्रमुख हैं। इन्हें परंपरागत रूप से खुले स्थान पर मिट्टी के बर्तन में पकाया जाता है। दूध-चावल का उफनना समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है।
जर्मन चांसलर के साथ पतंग उड़ाते दिखे पीएम
हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी अहमदाबाद में आयोजित इंटरनेशनल काइट फेस्टिवल में फ्रेडरिक मर्ज के साथ पतंग उड़ाते भी नजर आए थे। इस दौरान पीएम ने कहा था कि भारत और जर्मनी करीबी सहयोगी हैं और भारत में 2000 से अधिक जर्मन कंपनियों की मौजूदगी, जर्मनी के भारत पर विश्वास को दर्शाती है।




