आज देश में एक महत्वपूर्ण और चिंताजनक प्रश्न हमारे सामने खड़ा है। एक ओर मेडिकल साइंस के क्षेत्र में डॉक्टरों, नर्सों और स्वास्थ्यकर्मियों की भर्ती के लिए लगातार विज्ञापन जारी किए जा रहे हैं, फिर भी अनेक पद रिक्त रह जाते हैं। दूसरी ओर योगिक साइंस में स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध स्तर तक शिक्षा प्राप्त करने वाले हजारों योग्य युवा रोजगार के सीमित अवसरों के कारण अपने भविष्य को लेकर असमंजस में हैं।
पिछले एक दशक में योग को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभूतपूर्व पहचान मिली है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की घोषणा से लेकर भारत सरकार की विभिन्न योजनाओं तक, योग को स्वास्थ्य संवर्धन और जीवनशैली प्रबंधन के प्रभावी माध्यम के रूप में स्वीकार किया गया है। इसके बावजूद योगिक साइंस के विद्यार्थियों के लिए स्पष्ट करियर संरचना का अभाव आज भी बना हुआ है।

वास्तविकता यह है कि योगिक साइंस केवल आसनों और प्राणायाम तक सीमित विषय नहीं है। यह निवारक स्वास्थ्य सेवा, मानसिक स्वास्थ्य, पुनर्वास, जीवनशैली विकारों के प्रबंधन, शोध, शिक्षण और वेलनेस उद्योग जैसे अनेक क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है। आज जब मधुमेह, उच्च रक्तचाप, तनाव, अवसाद और मोटापा जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, तब योग विशेषज्ञों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है।
फिर भी अधिकांश अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य संस्थानों में योग विशेषज्ञों के नियमित पदों का अभाव दिखाई देता है। अनेक संस्थानों में योग सेवाएं तो संचालित हैं, लेकिन वहां प्रशिक्षित योगिक साइंस स्नातकों के लिए स्थायी रोजगार की व्यवस्था नहीं है। यह स्थिति योग शिक्षा प्राप्त युवाओं के साथ-साथ देश की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए भी चिंता का विषय है।
आवश्यकता इस बात की है कि योगिक साइंस के लिए एक स्पष्ट और सुदृढ़ Career Pathway विकसित किया जाए। मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों, आयुष संस्थानों, वेलनेस सेंटरों, कॉर्पोरेट हेल्थ प्रोग्राम्स और पुनर्वास केंद्रों में योग विशेषज्ञों के नियमित पद सृजित किए जाएं। साथ ही इंटर्नशिप, फेलोशिप, रिसर्च ग्रांट और स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रमों को भी बढ़ावा दिया जाए।
नई शिक्षा नीति और राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति के संदर्भ में भी योगिक साइंस को अधिक महत्व देने की आवश्यकता है। यदि योग को भारत की सांस्कृतिक विरासत और स्वास्थ्य सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है, तो इसके प्रशिक्षित युवाओं को भी समान रूप से अवसर और पहचान मिलनी चाहिए।
यह केवल रोजगार का मुद्दा नहीं है, बल्कि देश के भविष्य की स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा विषय है। नीति-निर्माताओं, विश्वविद्यालयों और स्वास्थ्य संस्थानों को मिलकर ऐसी व्यवस्था विकसित करनी होगी, जिससे योगिक साइंस के प्रतिभाशाली युवाओं को सम्मानजनक करियर, स्थिर रोजगार और समाज सेवा के व्यापक अवसर प्राप्त हो सकें।
योग का भविष्य तभी उज्ज्वल होगा, जब योग पढ़ने वाले युवाओं का भविष्य भी सुरक्षित और सम्मानजनक होगा।

