नई दिल्ली।
जेन-जी यानी 15 से 27 वर्ष आयु वर्ग के युवा पहली ऐसी पीढ़ी बन गए हैं, जिनकी बुद्धि (IQ), मेमोरी, ध्यान और समस्या सुलझाने की क्षमता अपने माता-पिता की पीढ़ी से कम पाई गई है। यह चौंकाने वाला खुलासा न्यूरो साइंटिस्ट Jared Cooney Horvath ने United States Senate की एक कमेटी के सामने किया।
डॉ. हॉरवाथ के अनुसार, डिजिटल टेक्नोलॉजी पर अत्यधिक निर्भरता इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह है। उन्होंने बताया कि 1800 के दशक के उत्तरार्ध के बाद यह पहली बार है, जब किसी पीढ़ी की बौद्धिक क्षमताएं पिछली पीढ़ी की तुलना में कमजोर हुई हैं।
स्क्रीन से नहीं, गहराई से सीखता है दिमाग
डॉ. हॉरवाथ ने कहा कि इंसानी दिमाग छोटे वीडियो, शॉर्ट कंटेंट और संक्षिप्त वाक्यों से गहराई से सीखने के लिए नहीं बना है।
मनुष्य गंभीर पढ़ाई, किताबों और आमने-सामने संवाद से बेहतर सीखता है, न कि लगातार स्क्रीन देखने से। उनके अनुसार, 2010 के बाद से बच्चों की बौद्धिक क्षमता में गिरावट दर्ज की जा रही है।
यूरोप में डिजिटल गैजेट्स पर लगाम
कई यूरोपीय देशों ने स्कूलों में डिजिटल उपकरणों के उपयोग को सीमित करना शुरू कर दिया है—
- Sweden ने स्कूलों से डिजिटल गैजेट हटाकर फिर से कागज-कलम और प्रिंटेड किताबों को अपनाया
- France, Netherlands, United Kingdom और Finland में भी टैबलेट और लैपटॉप का इस्तेमाल सीमित किया जा रहा है
यूनेस्को की चेतावनी
UNESCO की रिपोर्ट में भी चेताया गया है कि शिक्षा में तकनीक का अधिक उपयोग तब तक लाभकारी नहीं है, जब तक वह सीखने की गुणवत्ता न बढ़ाए।
अति आत्मविश्वास भी समस्या
विशेषज्ञों का कहना है कि जेन-जी युवाओं की एक बड़ी कमजोरी अति आत्मविश्वास है। वे अपनी क्षमताओं को लेकर जरूरत से ज्यादा आश्वस्त रहते हैं और अपनी कमजोरियों को पहचान नहीं पाते।
5 घंटे स्क्रीन टाइम, सबसे कम स्कोर
80 देशों के आंकड़ों पर आधारित इस शोध में सामने आया कि—
- जो छात्र रोज 5 घंटे कंप्यूटर पर पढ़ाई करते हैं, उनके स्कोर सबसे कम पाए गए
- जब हर छात्र को अलग डिजिटल डिवाइस देने की नीति लागू हुई, तब शैक्षणिक प्रदर्शन तेजी से गिरा
समाधान की ओर: योग और एकाग्रता
शिक्षा विशेषज्ञों ने बच्चों को स्मार्टफोन देने में देरी, छोटे बच्चों को फ्लिप फोन देने और स्कूलों में टेक्नोलॉजी पर राष्ट्रीय स्तर पर नियंत्रण की सिफारिश की है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि योग, ध्यान और प्राणायाम बच्चों में एकाग्रता, स्मृति और मानसिक संतुलन को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।




