राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अपने 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर संगठनात्मक ढांचे में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव करने की तैयारी में है। संघ समय-समय पर स्वयं को परिस्थितियों के अनुरूप ढालता रहा है। अब शताब्दी वर्ष के मौके पर संघ की आंतरिक संरचना में व्यापक परिवर्तन प्रस्तावित किया गया है, जिसे भविष्य के विस्तार और कार्यकुशलता से जोड़कर देखा जा रहा है।


प्रांत प्रचारक की जगह संभाग प्रचारक
सूत्रों के अनुसार, इस बदलाव का सबसे बड़ा असर प्रांत प्रचारक व्यवस्था पर पड़ेगा। नई रचना के तहत अब प्रांत प्रचारक नहीं होंगे, उनकी जगह संभाग प्रचारक नियुक्त किए जाएंगे। संभाग प्रचारकों का कार्यक्षेत्र अपेक्षाकृत छोटा होगा, जिससे संगठन का काम और अधिक प्रभावी व ज़मीनी स्तर पर मजबूत हो सकेगा।
इसके साथ ही हर राज्य के लिए एक राज्य प्रचारक की व्यवस्था की जाएगी, जो पूरे राज्य में संघ के कार्यों का समन्वय करेंगे।
उत्तर प्रदेश का उदाहरण
नई संरचना में लगभग दो प्रशासनिक मंडलों (कमिश्नरी) को मिलाकर एक संभाग बनाया जाएगा।
उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश में—
- वर्तमान में संघ के 6 प्रांत हैं (ब्रज, अवध, मेरठ, कानपुर, काशी, गोरक्ष)
- प्रशासनिक रूप से 18 मंडल हैं
- नई व्यवस्था में ये 18 मंडल मिलकर 9 संभाग बनाए जाएंगे
यानी उत्तर प्रदेश में अब 9 संभाग प्रचारक होंगे और पूरे राज्य के लिए एक राज्य प्रचारक कार्य करेगा। फिलहाल यहां 6 प्रांत प्रचारक जिम्मेदारी निभा रहे हैं।


क्षेत्र प्रचारकों की संख्या भी घटेगी
इस बदलाव का असर क्षेत्र प्रचारकों पर भी पड़ेगा।
- अभी पूर्वी यूपी के लिए एक और पश्चिमी यूपी–उत्तराखंड के लिए अलग क्षेत्र प्रचारक हैं
- नई व्यवस्था में पूरे यूपी और उत्तराखंड के लिए केवल एक क्षेत्र प्रचारक होगा
हालांकि दोनों राज्यों के राज्य प्रचारक अलग-अलग रहेंगे।
इसी तरह राजस्थान को संघ की दृष्टि से उत्तर क्षेत्र (दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पंजाब) के साथ जोड़ा जाएगा और इस पूरे क्षेत्र के लिए एक ही क्षेत्र प्रचारक होगा।
फिलहाल देशभर में संघ के 11 क्षेत्र प्रचारक हैं, जो नई संरचना लागू होने के बाद घटकर 9 रह जाएंगे। वहीं पूरे देश में लगभग 75 संभाग प्रचारक कार्यरत होंगे।

बैठकों की संरचना में भी बदलाव
संघ की बैठकों की व्यवस्था में भी अहम परिवर्तन प्रस्तावित है—
- मार्च में होने वाली सबसे बड़ी बैठक अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा अब हर साल नहीं, बल्कि हर तीन साल में नागपुर में होगी
- दीपावली के आसपास होने वाली अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक हर वर्ष की तरह जारी रहेगी
सूत्रों के मुताबिक, इस नई संरचना पर पिछले 5–6 वर्षों से मंथन चल रहा था। माना जा रहा है कि मार्च 2026 में होने वाली अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में इन प्रस्तावों पर अंतिम मुहर लग सकती है और 2027 से ये बदलाव ज़मीनी स्तर पर लागू हो सकते हैं। सूत्र – संघ के जानकार और वरिष्ठ पत्रकार



